नमस्ते शारदे देवी सरस्वती मतिप्रदे।
वसत्वं मम जिह्वाग्रे सर्वविद्याप्रदाभव॥Namaste Shārade Devi, Saraswati Mati‑prade
Vasatvaṃ Mama Jihvāgre, Sarva‑Vidya‑Pradā Bhava
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।
श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।
Shrīṃ Hrīṃ Sarasvatyai Svāhā.
ऐं वाग्वादिनी वद वद स्वाहा।
Aim Vāgvādinī Vad Vad Svāhā.
12 नाम (द्वादश नामावली)
ॐ भारत्यै नमः
ॐ सरस्वत्यै नमः
ॐ शारदायै नमः
ॐ हंसवाहिन्यै नमः
ॐ जगतीख्यातायै नमः
ॐ वाणीश्वर्यै (वागीश्वरीyai) नमः
ॐ कौमार्यै नमः
ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः
ॐ बुद्धिदात्र्यै नमः
ॐ वरदायिन्यै नमः
ॐ क्षुद्रघण्टायै (क्षुद्रघण्टायै/क्षुद्रघण्टायै) नमः
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
प्रथमं भारती नाम, द्वितीया तु सरस्वती, तृतीया शारदा देवी, चतुर्थ हंसवाहिनी, पंचम जगतिकायता, षष्ठ माहेश्वरी कथा, सप्तम तू कौमारी, अस्थम भ्रामराचारिणी, नवम विद्याधृतिनि, दशम वरदायिनी, एकादशम् रुद्रघंटा, द्वादशम भुनेश्वरी, अतानि द्वादशो नमामि या पितृचनुयादपि नाच विधा भव तत्स मन्त्र सिद्धिकर ताथा
ॐ ऐं नमः।
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि | विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ||
ओम ऐं ह्रीं क्लीं महा सरस्वती देवीय नमः
ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:
ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः
वद वद वाग्वादिनी स्वाहा
महो अर्णः सरस्वती प्रचेयति केतुना धियो विश्व विराजति
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने, विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते
ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः
ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम् । हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ॐ ||
प्रथमं भारती नाम, द्वितीया तु सरस्वती, तृतीया शारदा देवी, चतुर्थ हंसवाहिनी, पंचम जगतिकायता, षष्ठ माहेश्वरी कथा, सप्तम तू कौमारी, अस्थम भ्रामराचारिणी, नवम विद्याधृतिनि, दशम वरदायिनी, एकादशम् रुद्रघंटा, द्वादशम भुनेश्वरी, अतानि द्वादशो नमामि या पितृचनुयादपि नाच विधा भव तत्स मन्त्र सिद्धिकर ताथा
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्मक्षयम्कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नीलांजन समभास्वरूपिण्यै स्वाहा।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना, या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता, सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ||1|| शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं, वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्, हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्, वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्
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