Mata Siddhidatri - माता सिद्धिदात्री

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। About The supreme Goddess of Power, Adi-Parashakti, appeared in the form of Siddhidatri from the left half of Lord Shiva. She is the Goddess who possesses and bestows all type of Siddhis to her devotees. Even Lord Shiva got all Siddhis by grace of Goddess Siddhidatri. She is worshipped by not only humans but also by Deva, Gandharva, Asura, Yaksha and Siddha. Lord Shiva got the title of Ardha-Narishwar when Goddess Siddhidatri appeared from his left half. She sits on Kamal. Rides (सवारी): Lion(शेर) Hold (अत्र-शस्त्र) Four Hands: She has Gada in the one right hand, Chakra in the other right hand, lotus flower in the one left hand and Shankh in the other left hand. Assigning Planet (ग्रह): Ketu (केतु) नवरात्र से सम्बंधित अन्य आलेख पढ़े 

Mata Mahagauri - माता महागौरी

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। About According to Hindu mythologies, the Goddess Shailputri at the age of sixteen was extremely beautiful and was blessed with fair complexion. Due to her fair complexion Goddess Mahagauri is compared with the conch, the moon and the white flower of Kunda (कुंद). Due to her extreme fair complexion she was known as Goddess Mahagauri. She adorns white clothes only and due to that She is also known as Shwetambardhara (श्वेताम्बरधरा). Rides (सवारी): Bull(वृष) Hold (अत्र-शस्त्र) Four Hands: She carries Trishul in one right hand and keeps the second right hand in Abhaya Mudra. She adorns Damaru in the one left hand and keeps the second left hand in Varada Mudra. Assigning Planet (ग्रह): Rahu (राहू) Mandir (मंदिर): Maa Mahagauri can be seen in a temple at Kankhal, Haridwar नवरात्र से सम्बंधित अन्य आलेख पढ़े 

Mata Kalratri - माता कालरात्रि

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। About When the Goddess Parvati removed outer golden skin to kill demons named Shumbha and Nishumbha, She was known as Goddess Kalaratri. Kalaratri is the fiercest and the most ferocious form of Goddess Parvati. Goddess Kalaratri complexion is dark black. Because of her Shubh or auspicious power within her ferocious form Goddess Kalaratri is also known as Goddess Shubhankari (शुभंकरी). Rides (सवारी): Donkey(गधा) Hold (अत्र-शस्त्र) Four Hands: Her right hands are in Abhaya and Varada Mudra and She carries sword and the deadly iron hook in her left hands. Expression (मुद्रा): Most ferocious form of Goddess Parvati Assigning Planet (ग्रह): Shani (शनि) नवरात्र से सम्बंधित अन्य आलेख पढ़े 

Mata Katyayani - माता कात्यायनी

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। About To destroy demon Mahishasura, Goddess Parvati took the form of Goddess Katyayani. It was the most violent form of Goddess Parvati. In this form Goddess Parvati is also known as Warrior Goddess. According to religious texts Goddess Parvati was born at the home of sage Katya and due to which this form of Goddess Parvati is known as Katyayani. Rides (सवारी): Magnificent Lion(शोभायमान शेर) Hold (अत्र-शस्त्र) Four Hands: She carries lotus flower and sword in her left hands and keeps her right hands in Abhaya and Varada Mudras. Expression (मुद्रा): Most violent form Assigning Planet (ग्रह): Brihaspati (गुरु) नवरात्र से सम्बंधित अन्य आलेख पढ़े 

Mata Skandamata - माता स्कन्दमाता

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। About When Goddess Parvati became the mother of Lord Skanda (also known as Lord Kartikeya), Mata Parvati was known as Goddess Skandamata. She sits on lotus flower and because of that Skandamata is also known as Goddess Padmasana. The complexion of Goddess Skandamata is Shubhra (शुभ्र) which describes her white complexion. Devotees who worship this form of Goddess Parvati get the benefit of worshipping Lord Kartikeya. Rides (सवारी): Ferocious Lion(उग्र शेर) Hold (अत्र-शस्त्र) Four Hands: She carries baby Murugan in her lap. Lord Murugan is also known as Kartikeya and brother of Lord Ganesha. She carries lotus flowers in her upper two hands. She holds baby Murugan in one of her right hand and keeps the other right hand in Abhaya Mudra. Expression (मुद्रा): Motherhood Assigning Planet (ग्रह): Budha (बुद्ध) नवरात्र से सम्बंधित अन्य आलेख पढ़े 

Mata Chandraghanta - माता चंद्रघंटा

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। About She is the married form the Goddess Parvati. After getting married to Lord Shiva Goddess Mahagauri started adorning her forehead with half Chandra and due to which Goddess Parvati was known as Goddess Chandraghanta. She wears the semi-circular moon (Chandra) on her forehead. The half-moon on her forehead looks like the bell (Ghanta) and because of that she is known as Chandra-Ghanta. Rides (सवारी): Tigress(बाघिन) Hold (अत्र-शस्त्र) Ten Hands: She carries Trishul, Gada, Sword and Kamandal in her four right hands and keeps the fifth right hand in Varada Mudra. She carries lotus flower, Arrow, Dhanush and Japa Mala in her four left hands and keeps the fifth left hand in Abhaya Mudra. Expression (मुद्रा): Peaceful and for welfare of her devotees. Assigning Planet (ग्रह): Shukra (शुक्र) माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक...

Mata Brahmacharinid - माता ब्रह्मचारिणी

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। About She spent 1000 years on the diet of flowers and fruits and another 100 years on the diet on leafy vegetables while sleeping on the floor. She was on diet of Bilva leaves for 3000 years while She prayed to Lord Shankar. Later She even stopped eating Bilva leaves and continued her penance without any food and water. She was known as Aparna when She left eating Bilva leaves. Rides (सवारी): Walking on the bare feet. Hold (अत्र-शस्त्र) Two Hands: She carries Jap Mala in the right hand and Kamandal in the left hand. Assigning Planet (ग्रह): Mangal (मंगल) the provider of all fortunes. नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। श...

Mata Shailputri - माता शैलपुत्री

श्लोक वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् | वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् || या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। About She is also known as Hemavati and Parvati. देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में 'शैलपुत्री' के नाम से जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है शोभा वृषभ-स्थिता इन माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं। तब इनका नाम 'सती' था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। Rides (सवारी): Bull(वृष) and because of that she is also known as Vrisharudha (वृषारूढ़ा) Hold (अत्र...

किस दिन होगी नवदुर्गा के किस रूप की पूजा

नवरात्रि का आरंभ इस दौरान नवदुर्गा के नौ  रूपों की आराधना होगी। हर दिन मां के अलग-अलग रूप को समर्पित है। नवरात्र की नौ देवियां हमारे संस्कार एवं आध्यात्मिक संस्कृति के साथ जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि के प्रथम दिवस घट स्थापना, कलश स्थापना, ध्वजारोहण, श्री दुर्गा पूजा होगी और नवदुर्गा के पहले स्वरुप मां शैलपुत्री का पूजन होगा। नवरात्रि के द्वितीय दिवस मां ब्रह्राचारिणी का पूजन और चंद्र दर्शन होगा।   तृतीय दिवस देवी दुर्गा के चन्द्रघंटा रूप की पूजा होगी।  नवरात्रि के चौथे दिवस मां कूष्मांडा की पूजा होगी।  नवरात्रि के पंचम दिन मां स्कंदमाता की उपासना होगी।   छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना होगी। सातवें नवरात्रि की देवी मां कालरात्रि के साथ  श्री दुर्गा अष्टमी आठवें नवरात्रि की देवी महागौरी की पूजा  होगी। [[ कन्या पूजन भी किया जाएगा। ]] नवम दिन मां के सिद्धिदात्री स्वरुप का पूजन होगा,  नवरात्रे सम्पूर्ण ।  [[ कन्या पूजन भी किया जाएगा।  ]] दशमी के दिन नवरात्रि व्रत का पारण होगा।  [[ कन्या पूजन भी किया जाएगा। ...

गुप्त नवरात्र

चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के अलावा भी साल में दो नवरात्र ऐसे आते हैं जिनमें मां दुर्गा की दस महाव‍िद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है।  तंत्र व‍िद्या में आस्‍था रखने वाले लोगों के लिए यह नवरात्र बहुत महत्‍व रखते हैं।  इन नवरात्र को गुप्‍त नवरात्र कहा जाता है। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्र कहलाते हैं। हालांकि गुप्त नवरात्र को आमतौर पर नहीं मनाया जाता लेकिन तंत्र साधना करने वालों के लिये गुप्त नवरात्र बहुत ज्यादा मायने रखते हैं। तांत्रिकों द्वारा इस दौरान देवी मां की साधना की जाती है। नवरात्र से सम्बंधित अन्य आलेख पढ़े  हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है। इस दौरान देवी ...

Mata Kushmanda - माता कूष्माण्डा

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। About Kushmanda is the Goddess who has the power and capability to live inside the Sun. The glow and radiance of her body is as luminous as that of the Sun. also known as Ashtabhuja Devi. She also likes Bali of white pumpkin known as Kushmanda (कुष्माण्ड). Rides (सवारी): Loness(शेरनी) Hold (अत्र-शस्त्र) Eight Hands: She has Kamandal, Dhanush, Bada and Kamal in the right hands and Amrit Kalash, Jap Mala, Gada and Chakra in the left hands in that order. Expression (मुद्रा): Just flashing little bit of her smile. Assigning Planet (ग्रह): Sun (सूर्य) - Direction and energy provider to the Sun. नवरात्र से सम्बंधित अन्य आलेख पढ़े 

नवरात्र

नवरात्र भारतवर्ष में हिंदूओं द्वारा मनाया जाने प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्र आते हैं लेकिन चैत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक पड़ने वाले नवरात्र काफी लोकप्रिय हैं। बसंत ऋतु में होने के कारण चैत्र नवरात्र को वासंती नवरात्र तो शरद ऋतु में आने वाले आश्विन मास के नवरात्र को शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है। चैत्र और आश्विन नवरात्र में आश्विन नवरात्र को महानवरात्र कहा जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि ये नवरात्र दशहरे से ठीक पहले पड़ते हैं दशहरे के दिन ही नवरात्र को खोला जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में मां के अलग-अलग रुपों की पूजा को शक्ति की पूजा के रुप में भी देखा जाता है। मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि मां के नौ अलग-अलग रुप हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां की पूजा व उपवास किया जाता है। दसवें दिन कन्या पूजन के पश्चात उ...

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