गुप्त नवरात्र

गुप्त नवरात्र

चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के अलावा भी साल में दो नवरात्र ऐसे आते हैं जिनमें मां दुर्गा की दस महाव‍िद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है।  तंत्र व‍िद्या में आस्‍था रखने वाले लोगों के लिए यह नवरात्र बहुत महत्‍व रखते हैं।  इन नवरात्र को गुप्‍त नवरात्र कहा जाता है। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्र कहलाते हैं। हालांकि गुप्त नवरात्र को आमतौर पर नहीं मनाया जाता लेकिन तंत्र साधना करने वालों के लिये गुप्त नवरात्र बहुत ज्यादा मायने रखते हैं। तांत्रिकों द्वारा इस दौरान देवी मां की साधना की जाती है।

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हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।

देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए वर्ष के सबसे पवित्र और सिद्ध दिन नवरात्रि के माने गए हैं। इन नौ दिनों में देवी अपने भक्तों और साधकों पर पूर्ण कृपा बरसाती है। जो लोग जीवन में धन, मान, सुख, संपत्ति, वैभव और सांसारिक सुखों को पाना चाहते हैं, उन्हें नवरात्रि में देवी के सिद्ध दिनों में साधना जरूर करना चाहिए।

गुप्त नवरात्र पूजा विधि

मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

गुप्त नवरात्रि का महत्त्व

देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।

गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां

गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।


गुप्‍त नवरात्र में कैसे करें देवी की आराधना ?
बाकि नवरात्र की तरह ही गुप्‍त नवरात्र में देवी की पूजा की जाती है:
- पहले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्‍नान करने के बाद नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए कलश की स्थापना करनी चाहिए.
- घर के मंद‍िर में अखंड ज्‍योति जलाएं.
- सुबह-शाम मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. 
- अष्‍टमी या नवमी के दिन कन्‍या पूजन कर व्रत का उद्यापन करें. 
- नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशति का पाठ करना चाहिए. समय की कमी हो तो सप्त श्लोकी दुर्गा पाठ करना चाहिए. 
- तंत्र साधना करने वाले साधक गुप्‍त नवरात्र में माता के नौ रूपों की बजाए दस महाविद्याओं की साधना करते हैं.


कैसे  करें कलश स्‍थापना? 
- घर के मंदिर में घी का दीपक जलाने के बाद शुद्ध मिट्टी रखें. मिट्टी में जौं डालें और पवित्र जल का छ‍िड़काव करें.
- मिट्टी के ऊपर पीतल, तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर रखें. 
- कलश में सिक्‍के डालें और उसके चारों ओर मौली बांधें. पुष्‍प माला चढ़ाएं. 
- कलश को ढक कर आम के पांच पत्ते रखें. 
- लाल कपड़े में नारियरल लपेटकर कलश के ऊपर रख दें. 
- इसके बाद कलश पर सुपारी, साबुत चावल छ‍िड़कें और मां दुर्गा का ध्‍यान करें.  

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