Mata Brahmacharinid - माता ब्रह्मचारिणी

Mata Brahmacharinid - माता ब्रह्मचारिणी


या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
About
She spent 1000 years on the diet of flowers and fruits and another 100 years on the diet on leafy vegetables while sleeping on the floor. She was on diet of Bilva leaves for 3000 years while She
prayed to Lord Shankar. Later She even stopped eating Bilva leaves and continued her penance without any food and water. She was known as Aparna when She left eating Bilva leaves.
Rides (सवारी): Walking on the bare feet.
Hold (अत्र-शस्त्र)
Two Hands: She carries Jap Mala in the right hand and Kamandal in the left hand.
Assigning Planet (ग्रह): Mangal (मंगल) the provider of all fortunes.


नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है।


श्लोक
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु | देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

शक्ति
इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। जिससे उनका जीवन सफल हो सके और अपने सामने आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सामना आसानी से कर सकें।

फल
माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता।

माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है।

इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं।

उपासना
प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।
नवरात्र से सम्बंधित अन्य आलेख पढ़े 

टिप्पणियाँ

श्रेणियां

अच्युतं केशवं रामनारायणम्2 अच्युतस्याष्टकम्2 अथर्वशीर्ष1 अहोई माता1 आरती3 ऋण मोचक मंगल स्तोत्र1 कनकधारा स्तोत्र2 कनकधारा स्तोत्रम् (हिन्दी पाठ)1 करवा चौथ1 कष्ट विमोचन मंगल स्तोत्र1 कामदा एकादशी1 कृष्ण2 कौण्डिन्य ऋषि1 गजमुख2 गणपति स्रोत4 गणेश5 गणेश स्तोत्रं1 गीत1 गोपालं1 चालीसा3 चैत्र नवरात्रि1 णमोकार मंत्र1 दशरथकृत शनि स्तोत्र1 दुर्गा पूजा11 दुर्गाष्टमी1 देवी1 देवीचालीसा1 नमस्ते शारदे देवी1 नवदुर्गा11 नवरात्र12 नवरात्रि11 निर्वाण षटकम्1 नील1 नील सरस्वती स्तोत्र2 पितृ दोष1 पुरुषोत्तम मास1 पूजन1 प्रार्थना1 बजरंग बाण2 बधाई भजन1 बाल कृष्ण3 भज गोविन्दम्1 भजन1 भागवत1 भोग आरती1 मंगल स्तोत्र1 मंत्र6 मङ्गलम् भगवान विष्णुः1 मनसा देवी1 मनसा सततम् स्मरणीयम्1 मनसादेवी1 महा नवरात्रि10 महाशिवरात्रि9 महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्1 महिषासुरमर्दिनी. स्तोत्रम्1 राम नवरात्रि10 रामत्व1 रामदूत1 रामायणं1 रुद्राष्टकम्1 वंदना5 वसंत नवरात्रि1 विघ्नहर्ता2 विद्वान् सर्वत्र पूज्यते1 विष्णुपञ्जरस्तोत्रम्1 वैष्णो1 वैष्णो देवी1 शांति मंत्र1 शारदा स्तोत्रं1 शिव का चमत्कारी स्त्रोत2 शिवताण्डवस्तोत्रम्1 शिवरात्रि4 श्री गजानन प्रसन्न1 श्री गणेश1 श्री दत्तात्रेयवज्रकवचम्‌1 श्री शिव1 श्री शिव चालीसा1 श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र1 श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्1 श्री शिवमङ्गलाष्टकम्1 श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक2 श्री सरस्वती4 श्री स्कन्द पुराण1 श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र1 श्रीगणपति3 श्रीमद् हनुमन्त बीसा1 श्रीराम तांडव स्तोत्रम्1 षोडशोपचार पूजन1 सप्तश्लोकी दुर्गा1 सरस्वती12 सरस्वती वंदना8 सरस्वती वंदना मंत्र1 सरस्वती स्तोत्रं1 सुखदाता1 सुभाषितानि3 स्तोत्र2 स्तोत्रम्1 स्त्रोत1 हनुमान2 हनुमान वडवानल स्तोत्र1 Astrology2 Chalisa1 gitapress1 kalyan1 Mangal Stotra1 Religious books1 Saraswati1 shiv1 Shri Hanuman4 Shri Hanuman Chalisa1